लोक नाट्य अर्थ और परिभाषा:- ‘लोक नाट्य, दो शब्दों लोक और नाट्य से मिलकर बना है। लोक का आशय उस जनसामान्य वर्ग से है जो अभिजात्य संस्कार, शास्त्रीयता, पाणिटंयू चेतना तथा अहंकार से शून्य है। नाट्य का तात्पर्य है नाटक अर्थात किसी कथानक को…
किलकत कान्ह घुटुरुवनि आवत ( पद ) जीवन परिचय :- सूरदास जी कृष्णभक्ति काव्य धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि थे। इनका…
जसोदा हरि पालनैं झुलावै जीवन परिचय :- सूरदास जी कृष्णभक्ति काव्य धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि थे। इनका जन्म सम्वत् 1540…
खेलत में को काकौ गुसैयाँ (सूरदास के पद) जीवन परिचय :- सूरदास जी का जन्म १४७८ को बैशाख शुक्ल पंचमी…
अविगत गति कछु कहत न आवै जीवन परिचय :- सूरदास जी कृष्णभक्ति काव्य धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि थे। इनका जन्म…
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लोक साहित्य ⇒परिभाषा और वर्गीकरण: साहित्य मानव मन की प्रतिछवी है। यह…
हिन्दी साहित्य
लोक साहित्य ⇒परिभाषा और वर्गीकरण: साहित्य मानव मन की प्रतिछवी है। यह मानव मन के भाव, दशा, सामाजिक स्थितियों तथा विभिन्न परिस्थितियों की सहज…
कविता :- छाया मत छूना लेखक परिचय :- गिरिजा कुमार माथुर का…
मेरी जिंदगी का एक दिन 3 मार्च, 1887, मैं सात साल की…
अमृत संदेश ऐ भावी सुधारकों, ऐ भावी देशभक्तों ! तुमलोग हृदयवान बनो,…
देवी-देवता
लोक नाट्य अर्थ और परिभाषा:- ‘लोक नाट्य, दो शब्दों लोक और नाट्य से मिलकर बना है। लोक का आशय…
पौराणिक कथाएँ
लोक नाट्य अर्थ और परिभाषा:- ‘लोक नाट्य, दो शब्दों लोक और नाट्य से मिलकर बना है। लोक का आशय उस जनसामान्य वर्ग से है जो…